LIFE CHANGING VASTU TIPS
Testimonial
-
उनका एस्ट्रोलॉजी और वास्तु का ज्ञान बहुत ही गहरा है| बहुत ही आम भाषा में साथ ही बहुत उपयोगी उपाय निशुल्क बताते है, साथ ही जो प्रोफेशनल पैड सर्विस है उनको भी बहुत ही ट्रांसपेरेंट तारिक से एडवांस में बता दिया जाता है.....। अतः आप बेफिक्र हो कर सेवा ले सकते साथ ही चैनल भी रिकमेंड कर सकते है।
Laxman Mewar
April 1, 2024आचार्य प्रणब जी काफी सटीक विश्लेषण करते हैं तथा उनके जो बात करने की शैली है वह बहुत ही प्रेम पूर्ण तथा शालीनता पूर्ण है। थोड़ी देर बात करने पर ही मन को बहुत शांति मिली और आपको भी कोई यदि बहुत गंभीर समस्या है और आप बहुत परेशान है तो इधर उधर भटकने की बजाय प्रणव जी से संपर्क करें जय माता दी
Astro Jyotii
October 17, 2021Pranav ji is extremely great person . Highly recommended ��
Adesh Vishwakarma
September 25, 2022 -
Famous astrologer in Uttar Pradesh for love relationship problems, chlid problems astro pranav ojha located on Uttar Pradesh.
Somya Panday
September 7, 2022Very accurate predictions and perfect analysis of horoscope. The remedies suggested are also very simple, easy to do and economical.
Shiva Reddy
October 3, 2022Really helped me with solutions to my problems.All of his predictions are accurate and correct. He also helped me in solving my financial problems
Vicky Manodra
September 28, 2022 -
one of the best astrologer I meet on Facebook
दीपक कुमार
September 19, 2024They are super astro pranav Ojha was really nice astrologer thier face reading and horoscope really to good �.
Rohit Mishra
September 7, 2022अति उत्तम जानकारी दी जाती हैं
Jitendra Kumar
August 20, 2023 -
Are bhot sandarr he ye Peg jay shree ganesh ki �
Ganesh Dash
August 20, 2023i have suggested to few friends about guruji for their coming problem in their life.
Aarohi Thakur
September 7, 2022I have consulted about my working problem , astro pranav ojha they gave me better solution for my problem I really like it , thank you Guru ji
Shivani Vishwakarma
September 7, 2022 -
He is the best astrologer & really good knowledge person
Sumit Shah
September 30, 2022Best astrologer in Uttar Pradesh for health related problems. Also I have always health issues after their meeting My health related all problems go out I fully fit . Thank you guruji�. .
Sameer Kumar
September 7, 2022very nice tips of astrology
Shiekhaa Sharma
April 1, 2024 -
astro Pranav ojha ji is the best astrologer who completely changed my life with his valuable readings. I feel so greatful to meet him.
Emmett Olive
September 5, 2022Yes,He is best in his field.I can 100% sure you will get good result. Good work for Sanatan.
Sushama Singh
September 19, 2024Really best Astrology service and most fantastic service from this.
Ritesh Deshmukh
September 5, 2022 -
Astro pranav ojha gave,excellent treatment by the horoscope reading and face reading,I have very worriod about me career, there Astro pranav ojha who always help me . And gave better idea to choice right option on my career,Thank you sir 🙏
Kariya Sah
September 7, 2022best astrologer I have experienced and feel that his pridiction is more accurate
Ranjan Bhagvat
October 1, 2022Very good consultation , Very good understanding of the situation , best suggestion, fully satisfied. One should consult him for their problems
Mukesh John
October 1, 2022 -
He was very trustworthy astrologer, I met, I am really thankful because I consult many astrologer but they not gave right solution but they really genuins astrologer guys.
Rajat Sharma
September 7, 2022I recommended all for taking best suggestion
Ajay Yaduvanshi
October 3, 2022He is always telling the correct thing in order to solve the problem as he giving successful solutions.
Mukesh Singh
September 7, 2022 -
*अति दुर्लभ एक ग्रंथ ऐसा भी है हमारे सनातन धर्म मे* इसे तो सात आश्चर्यों में से पहला आश्चर्य माना जाना चाहिए --- *यह है दक्षिण भारत का एक ग्रन्थ* क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो राम कथा के रूप में पढ़ी जाती है और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े तो कृष्ण कथा के रूप में होती है । जी हां, कांचीपुरम के 17वीं शदी के कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ "राघवयादवीयम्" ऐसा ही एक अद्भुत ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ को ‘अनुलोम-विलोम काव्य’ भी कहा जाता है। पूरे ग्रन्थ में केवल 30 श्लोक हैं। इन श्लोकों को सीधे-सीधे पढ़ते जाएँ, तो रामकथा बनती है और विपरीत (उल्टा) क्रम में पढ़ने पर कृष्णकथा। इस प्रकार हैं तो केवल 30 श्लोक, लेकिन कृष्णकथा (उल्टे यानी विलोम)के भी 30 श्लोक जोड़ लिए जाएँ तो बनते हैं 60 श्लोक। पुस्तक के नाम से भी यह प्रदर्शित होता है, राघव (राम) + यादव (कृष्ण) के चरित को बताने वाली गाथा है ~ "राघवयादवीयम।" उदाहरण के तौर पर पुस्तक का पहला श्लोक हैः वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः । रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥ अर्थातः मैं उन भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम करता हूं, जो जिनके ह्रदय में सीताजी रहती है तथा जिन्होंने अपनी पत्नी सीता के लिए सहयाद्री की पहाड़ियों से होते हुए लंका जाकर रावण का वध किया तथा वनवास पूरा कर अयोध्या वापिस लौटे। अब इस श्लोक का विलोमम्: इस प्रकार है सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः । यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥ अर्थातः मैं रूक्मिणी तथा गोपियों के पूज्य भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में प्रणाम करता हूं, जो सदा ही मां लक्ष्मी के साथ विराजमान है तथा जिनकी शोभा समस्त जवाहरातों की शोभा हर लेती है। " राघवयादवीयम" के ये 60 संस्कृत श्लोक इस प्रकार हैं:- राघवयादवीयम् रामस्तोत्राणि वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः । रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥ विलोमम्: सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः । यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥ साकेताख्या ज्यायामासीद्याविप्रादीप्तार्याधारा । पूराजीतादेवाद्याविश्वासाग्र्यासावाशारावा ॥ २॥ विलोमम्: वाराशावासाग्र्या साश्वाविद्यावादेताजीरापूः । राधार्यप्ता दीप्राविद्यासीमायाज्याख्याताकेसा ॥ २॥ कामभारस्स्थलसारश्रीसौधासौघनवापिका । सारसारवपीनासरागाकारसुभूरुभूः ॥ ३॥ विलोमम्: भूरिभूसुरकागारासनापीवरसारसा । कापिवानघसौधासौ श्रीरसालस्थभामका ॥ ३॥ रामधामसमानेनमागोरोधनमासताम् । नामहामक्षररसं ताराभास्तु न वेद या ॥ ४॥ विलोमम्: यादवेनस्तुभारातासंररक्षमहामनाः । तां समानधरोगोमाननेमासमधामराः ॥ ४॥ यन् गाधेयो योगी रागी वैताने सौम्ये सौख्येसौ । तं ख्यातं शीतं स्फीतं भीमानामाश्रीहाता त्रातम् ॥ ५॥ विलोमम्: तं त्राताहाश्रीमानामाभीतं स्फीत्तं शीतं ख्यातं । सौख्ये सौम्येसौ नेता वै गीरागीयो योधेगायन् ॥ ५॥ मारमं सुकुमाराभं रसाजापनृताश्रितं । काविरामदलापागोसमावामतरानते ॥ ६॥ विलोमम्: तेन रातमवामास गोपालादमराविका । तं श्रितानृपजासारंभ रामाकुसुमं रमा ॥ ६॥ रामनामा सदा खेदभावे दया-वानतापीनतेजारिपावनते । कादिमोदासहातास्वभासारसा-मेसुगोरेणुकागात्रजे भूरुमे ॥ ७॥ विलोमम्: मेरुभूजेत्रगाकाणुरेगोसुमे-सारसा भास्वताहासदामोदिका । तेन वा पारिजातेन पीता नवायादवे भादखेदासमानामरा ॥ ७॥ सारसासमधाताक्षिभूम्नाधामसु सीतया । साध्वसाविहरेमेक्षेम्यरमासुरसारहा ॥ ८॥ विलोमम्: हारसारसुमारम्यक्षेमेरेहविसाध्वसा । यातसीसुमधाम्नाभूक्षिताधामससारसा ॥ ८॥ सागसाभरतायेभमाभातामन्युमत्तया । सात्रमध्यमयातापेपोतायाधिगतारसा ॥ ९॥ विलोमम्: सारतागधियातापोपेतायामध्यमत्रसा । यात्तमन्युमताभामा भयेतारभसागसा ॥ ९॥ तानवादपकोमाभारामेकाननदाससा । यालतावृद्धसेवाकाकैकेयीमहदाहह ॥ १०॥ विलोमम्: हहदाहमयीकेकैकावासेद्ध्वृतालया । सासदाननकामेराभामाकोपदवानता ॥ १०॥ वरमानदसत्यासह्रीतपित्रादरादहो । भास्वरस्थिरधीरोपहारोरावनगाम्यसौ ॥ ११॥ विलोमम्: सौम्यगानवरारोहापरोधीरस्स्थिरस्वभाः । होदरादत्रापितह्रीसत्यासदनमारवा ॥ ११॥ यानयानघधीतादा रसायास्तनयादवे । सागताहिवियाताह्रीसतापानकिलोनभा ॥ १२॥ विलोमम्: भानलोकिनपातासह्रीतायाविहितागसा । वेदयानस्तयासारदाताधीघनयानया ॥ १२॥ रागिराधुतिगर्वादारदाहोमहसाहह । यानगातभरद्वाजमायासीदमगाहिनः ॥ १३॥ विलोमम्: नोहिगामदसीयामाजद्वारभतगानया । हह साहमहोदारदार्वागतिधुरागिरा ॥ १३॥ यातुराजिदभाभारं द्यां वमारुतगन्धगम् । सोगमारपदं यक्षतुंगाभोनघयात्रया ॥ १४॥ विलोमम्: यात्रयाघनभोगातुं क्षयदं परमागसः । गन्धगंतरुमावद्यं रंभाभादजिरा तु या ॥ १४॥ दण्डकां प्रदमोराजाल्याहतामयकारिहा । ससमानवतानेनोभोग्याभोनतदासन ॥ १५॥ विलोमम्: नसदातनभोग्याभो नोनेतावनमास सः । हारिकायमताहल्याजारामोदप्रकाण्डदम् ॥ १५॥ सोरमारदनज्ञानोवेदेराकण्ठकुंभजम् । तं द्रुसारपटोनागानानादोषविराधहा ॥ १६॥ विलोमम्: हाधराविषदोनानागानाटोपरसाद्रुतम् । जम्भकुण्ठकरादेवेनोज्ञानदरमारसः ॥ १६॥ सागमाकरपाताहाकंकेनावनतोहिसः । न समानर्दमारामालंकाराजस्वसा रतम् ॥ १७ विलोमम्: तं रसास्वजराकालंमारामार्दनमासन । सहितोनवनाकेकं हातापारकमागसा ॥ १७॥ तां स गोरमदोश्रीदो विग्रामसदरोतत । वैरमासपलाहारा विनासा रविवंशके ॥ १८॥ विलोमम्: केशवं विरसानाविराहालापसमारवैः । ततरोदसमग्राविदोश्रीदोमरगोसताम् ॥ १८॥ गोद्युगोमस्वमायोभूदश्रीगखरसेनया । सहसाहवधारोविकलोराजदरातिहा ॥ १९॥ विलोमम्: हातिरादजरालोकविरोधावहसाहस । यानसेरखगश्रीद भूयोमास्वमगोद्युगः ॥ १९॥ हतपापचयेहेयो लंकेशोयमसारधीः । राजिराविरतेरापोहाहाहंग्रहमारघः ॥ २०॥ विलोमम्: घोरमाहग्रहंहाहापोरातेरविराजिराः । धीरसामयशोकेलं यो हेये च पपात ह ॥ २०॥ ताटकेयलवादेनोहारीहारिगिरासमः । हासहायजनासीतानाप्तेनादमनाभुवि ॥ २१॥ विलोमम्: विभुनामदनाप्तेनातासीनाजयहासहा । ससरागिरिहारीहानोदेवालयकेटता ॥ २१॥ भारमाकुदशाकेनाशराधीकुहकेनहा । चारुधीवनपालोक्या वैदेहीमहिताहृता ॥ २२॥ विलोमम्: ताहृताहिमहीदेव्यैक्यालोपानवधीरुचा । हानकेहकुधीराशानाकेशादकुमारभाः ॥ २२॥ हारितोयदभोरामावियोगेनघवायुजः । तंरुमामहितोपेतामोदोसारज्ञरामयः ॥ २३॥ विलोमम्: योमराज्ञरसादोमोतापेतोहिममारुतम् । जोयुवाघनगेयोविमाराभोदयतोरिहा ॥ २३॥ भानुभानुतभावामासदामोदपरोहतं । तंहतामरसाभक्षोतिराताकृतवासविम् ॥ २४॥ विलोमम्: विंसवातकृतारातिक्षोभासारमताहतं । तं हरोपदमोदासमावाभातनुभानुभाः ॥ २४॥ हंसजारुद्धबलजापरोदारसुभाजिनि । राजिरावणरक्षोरविघातायरमारयम् ॥ २५॥ विलोमम्: यं रमारयताघाविरक्षोरणवराजिरा । निजभासुरदारोपजालबद्धरुजासहम् ॥ २५॥ सागरातिगमाभातिनाकेशोसुरमासहः । तंसमारुतजंगोप्ताभादासाद्यगतोगजम् ॥ २६॥ विलोमम्: जंगतोगद्यसादाभाप्तागोजंतरुमासतं । हस्समारसुशोकेनातिभामागतिरागसा ॥ २६॥ वीरवानरसेनस्य त्राताभादवता हि सः । तोयधावरिगोयादस्ययतोनवसेतुना ॥ २७॥ विलोमम् नातुसेवनतोयस्यदयागोरिवधायतः । सहितावदभातात्रास्यनसेरनवारवी ॥ २७॥ हारिसाहसलंकेनासुभेदीमहितोहिसः । चारुभूतनुजोरामोरमाराधयदार्तिहा ॥ २८॥ विलोमम् हार्तिदायधरामारमोराजोनुतभूरुचा । सहितोहिमदीभेसुनाकेलंसहसारिहा ॥ २८॥ नालिकेरसुभाकारागारासौसुरसापिका । रावणारिक्षमेरापूराभेजे हि ननामुना ॥ २९॥ विलोमम्: नामुनानहिजेभेरापूरामेक्षरिणावरा । कापिसारसुसौरागाराकाभासुरकेलिना ॥ २९॥ साग्र्यतामरसागारामक्षामाघनभारगौः ॥ निजदेपरजित्यास श्रीरामे सुगराजभा ॥ ३०॥ विलोमम्: भाजरागसुमेराश्रीसत्याजिरपदेजनि ।स गौरभानघमाक्षामरागासारमताग्र्यसा ॥ ३०॥ ॥ इति श्रीवेङ्कटाध्वरि कृतं श्री ।। *कृपया अपना थोड़ा सा कीमती वक्त निकाले और उपरोक्त श्लोको को गौर से अवलोकन करें कि यह दुनिया में कहीं भी ऐसा न पाया जाने वाला ग्रंथ है ।* जय श्री राम
दिलीप निगम
April 19, 2020Highly experienced and supportive astrologer with immense knowledge. I was fortunate to see positive results after his consultation
Nishant Kumar
September 30, 2022Pranav Ojha is so wonderful and most popular Astrology service provider. Recommended this so much
Aarti Kumari
September 5, 2022 -
Positive experience. In addition to accurate prediction, he also suggested remedies to solve the negative aspects.
Raj Karan
October 3, 2022Highly recommend to you all. They gave best treatment I liked their Face reading and horoscope reading.
Roshan Singh
September 7, 2022I really recommend to you all must visit it and you have any health related problems must consultant them they are nice astrologer.
Manju Kumari
September 7, 2022

Pranav Upmanyu
VASTU CONSULTANCY
We, at Pranav Upmanyu help to energize the Property and Diminish the Vastu Dosha Flaws without suggesting major Structural Changes for all types of properties. We take a holistic view and guide on Vastushatra, Astrology, Colour Charts etc. We energize the property with our range of Energizers & Vastu Dosh Rectifiers.

RESIDENTIAL FLAT

OFFICE

FACTORY

SHOWROOM

BUNGALOW/ VILLA

RESTAURANT

HOTEL

PLOT OF LAND

TOWNSHIP